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Indore, Madhya Pradesh, 452011

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Udhav Tour and Travels

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Maa Narmada Parikrama

Daywise Narmada Parikrama Tour Package Day 1 : Arrival in Indore Day 2 : Omkareshwar (80 km/2-3 Hrs) Day 3 : Omkareshwar - Barwani - Shahada (250km/5 Hrs) Day 4 : Narmada Parikrama tour Day 5 : Ankleshwar – Bharuch – Kukshi (255 km/5 Hrs) Day 6 : Kukshi – Maheshwar (100 km/2 Hrs) Day 7 : Maheshwar – Barwaha – Khategaon (210 km/4 Hrs) Day 8 : Khategaon – Nemawar – Bareli (180 km/4 Hrs) Day 9 : Bareli - Udaipura - Jabalpur (230 km/6 Hrs) Day 10 : Jabalpur - Shahdol - Amarkantak (230 km/5 Hrs) Day 11 : Jabalpur - Shahdol - Amarkantak (230 km/5 Hrs) Day 12 : Amarkantak - Mandla (150 km/4 Hrs) Day 13 : Mandla - Narsinghpur (160 km/4 Hrs) Day 14 : Narsinghpur - Hoshangabad (175 km/4 Hrs) Day 15 : Hoshangabad - Omkareshwar (245 km/6 Hrs) Day 16 : Omkareshwar - Ujjain (140 km/3 Hrs) Day 17 : Ujjain - Indore (54 km/1-2 Hrs)

Maa Narmada Parikrama

Maa Narmada Parikrama

Starts: November 1, 2025, 09:00

Ends: March 31, 2026, 00:00

Offer details

नर्मदा परिक्रमा नर्मदा नदी के चारों ओर की एक पवित्र तीर्थयात्रा है, जो पारंपरिक रूप से पैदल की जाती है और इसमें लगभग 3,500 किलोमीटर की यात्रा शामिल होती है, जिसे पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं। इसे करते समय नर्मदा नदी को हमेशा दाहिनी ओर रखा जाता है, जिसमें नदी के दक्षिणी तट से यात्रा शुरू करके गुजरात में खंभात की खाड़ी तक जाना होता है, फिर नदी को पार करके उत्तरी तट से होते हुए वापस अमरकंटक (या परिक्रमा के शुरुआती बिंदु) तक आना होता है। परिक्रमा समाप्त होने पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाना अनिवार्य है। परिक्रमा की विधि: 1. संकल्प और जल: परिक्रमा शुरू करने से पहले नर्मदा जल से संकल्प किया जाता है और एक कलश में जल भरकर साथ ले जाया जाता है। 2. नदी के तट का अनुसरण: परिक्रमा करने वाले व्यक्ति को नदी के किनारे चलते हुए नदी को अपने दाहिनी ओर रखते हुए आगे बढ़ना होता है। 3. तटों का परिवर्तन: यात्रा के एक चरण में, जब परिक्रमा गुजरात में खंभात की खाड़ी तक पहुँचती है, तो तट बदल लिया जाता है। 4. परिक्रमा का समापन: परिक्रमा अंततः उस स्थान पर समाप्त होती है जहाँ से इसे शुरू किया गया था, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, यह ओंकारेश्वर में पूरी मानी जाती है जब वहाँ नर्मदा जल शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। नियम और परंपराएँ: नदी का जल: परिक्रमा के दौरान नर्मदा नदी में स्नान करने और नर्मदा का ही जल पीने की परंपरा है। वाणी का संयम: परिक्रमा के दौरान व्यर्थ की बातें, निंदा और चुगली से बचते हुए वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। दान का नियम: परिक्रमा के दौरान दान ग्रहण न करने का भी नियम है। सत्य का पालन: परिक्रमा करते हुए हमेशा सत्य बोलना चाहिए और वाणी का संयम बनाए रखना चाहिए। परिक्रमा के प्रकार: पैदल परिक्रमा: सबसे पारंपरिक और आध्यात्मिक मानी जाती है, जिसमें कई महीने लग सकते हैं। वाहन द्वारा परिक्रमा: यदि समय या शारीरिक क्षमता की कमी हो, तो टेम्पो ट्रैवलर, कार या बस से भी यह यात्रा की जा सकती है।